Posted on: 27 Apr 2017
फिल्म : सफलता शोहरत इंसान की बहुत सारी बुराइओ को छिपा लेती है और चमचे लोग उसे महान बनाने पर तुले रहते है, यह काम ब्राह्मणवादी लोग बहुत अच्छे ढंग से करते है, बिना बात में अपने ब्राह्मणवादी मित्र की तारीफों के पुलिंदे बांधते रहते है जबकि ऐसा होता नहीं है.
फिल्म जगत में लता मंगेशकर ऐसा ही एक नाम है जिसे लोग सुरों की देवी या सुरों की मलिका कहते है जबकी यह बिलकुल गलत है दरसल वैसे तो गाते-गाते आदमी गवैय्य हो जाता है वही हाल लता मंगेशकर का है, अगर हम लता के शुरूआती दौर को देखे तो ये मलिका ए तरन्नुम नूरजहा के सामने कही नहीं ठहरती थी,

लेकिन लता मंगेशकर ने अपनी ब्राह्मणवादी चाल चलते हुए नूरजहा से काम छिनने लगी यहाँ तक की हिन्दू प्रोडूसर भी लता को न चाहते हुए भी काम देने लगे, लेकिन जो बात नूरजहा में थी वो लता में नहीं थी .लता इसलिए भी आगे बढ़ गई क्योकि नूरजहा का जीवन थोडा रहा. लता मंगेशकर वह औरत है जो अपनी बहन से बी आगे निकलने के लिए कुछ भी कर सकती है यह बात सबो ध्यान है की ए मेरे वतन के लोगो गाना लेने के लिए लता ने अपनी सारी धूर्त चाल चली और गाना हांसिल कर लिया .

एक बार एक प्रोडूसर ने जब यह कहा की आपको डॉ. बी.आर. अम्बेडकर पर गाना गाना है तो लता ने साफ़ साफ़

Posted on: 14 Feb 2017
फ़िल्मी दुनिया में कुछ नाम ऐसे है जो सिर्फ इसलिए मशहूर है क्योकि उनके पीछे एक बहुत बड़ा जातिय और धार्मिक समीकरण जुड़ा हुआ है अन्यथा वो लोग कही भी नहीं जैसे राज कपूर , राज कुमार , मनोज कुमार , राजेंदर कुमार धर्मेन्द्र , आदि आदि ऐसा ही एक नाम है महमूद का जिसे बोलीवूड में कॉमेडी का किंग कहा जाता है और कुछ लोग और संघठन बाकी कोमेडी कलाकारों के साथ कोई न्याय ही नहीं करना चाहते .

अगर हम दिए गए नाम के कलाकारों के बारे में देखे तो पायंगे की इन कलाकारों को एक्टिंग के नाम पर अंडा भी नहीं आता था , चाहे राज कुमार हो या दिलीप कुमार या राजेन्द्र कुमार लेकिन फिर भी ये नाम मश्हूर है उसका कारण इनकी एक्टिंग नहीं उस वक्त की अच्छी कहानिया , संगीत जयादा होता था ये लोग तो टाइप्ड एक्टर थे एक ही स्टाइल , एक तरह का चलना , एक तरह का रोना बस कुछ नहीं .

महमूद भी उन्ही कलाकारों में शामिल है अगर देखा जाए तो महमूद उस वक्त के अन्य कोमेडी कलाकारों से थोडा हट के जरूर था जिसका कारण था उसने कई तरह के रोल किये , कई कलाकारों के साथ काम किया और कई फिल्म भी बनाई जो अपनी तरह की बहुत बेहतरीन फिल्म थी अगर ध्यान से देखे तो महमूद ने राज कपूर के दिमाग को प्रव्ज

Posted on: 07 Aug 2016
12 अगस्त को प्रदर्शित होने वाली फिल्म मोहेंजो-दारो को राजन कुमार का यह लेख भारत की आदिवासी परंपरा और इतिहास पर शातिर हमला बता रहा है। इस फिल्म को बैन किये जाने की मांग कर रहा है। सवाल है कि अपनी मनमाना व्याख्याओं के साथ अच्छी फिल्मों पर कैंची चलाने वाला सेंसर बोर्ड इस इतिहास विरोधी फिल्म को रिलीज होने से रोक सकेगा

अगस्त को जब पूरा संसार ‘विश्व आदिवासी दिवस’ मना रहा होगा और भारत के आदिवासी ‘विश्व आदिवासी दिवस’ मनाकर 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी कर रहे होंगे, तभी 12 अगस्त को आदिवासियों पर एक फिल्म ‘खलनायक’ जैसी अभद्र और असहनीय नस्लीय टिप्पणी करेगी।

दुनिया की प्राचीन और महानतम सभ्यता ‘सिंधु घाटी सभ्यता’ पर आधारित आशुतोष गोविरकर द्वारा निर्मित फिल्म ‘मोहेंजो-दारो’ का तीखा विरोध करते हुए आदिवासी समाज ने झारखण्ड, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में पुलिस में मामला दर्ज कराया है। गांव, तहसील और जिला स्तर से लेकर सोशल मीडिया तक में आदिवासियों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

फिल्म मोहेंजो-दारो में आशुतोष गोविरकर ने आर्यों को सिंधु सभ्यता का वासी बताया है और आर्य नायक शरमन (ऋतिक रोशन) द्वारा खलनायक महम (कबीर बेदी, जो महिषासुर के लुक में हैं) और उसकी सत्ता का

Posted on: 03 Feb 2016
Not only in India but across the world Systematic planned murder of a Dalit Student has ignited the unrest among the all intellectuals , social circles and political circle , students from Oxford , Boston , Alberta Indonesia , Japan , have raised their voice against Indian Government and Delhi Police action
Day before yester Delhi Police Commissioner who is devotee of Narender Modi ordered the lathcharge on the students in which girls indiscriminately were beaten and manhandled by the goons of RSS
This incidence has created anger all over the world , Bollywood has not remained untouched by this incidence and many famous personalities has criticized the lathi charge move by Delhi police ironically Delhi police support the goons of RSS who are fearlessly beaten the girls students mercilessly .
This is first time in India when this type of incident has taken place many actors model are in fear they totlly criticized , Documentary film maker Surender Kumar , has expressed his concern over the incidence and said the atmosphere of the country is more worse then

Posted on: 29 Jan 2016
हाल ही में रिलीज़ हुई फिल्म एयर लिफ्ट की सभी घटनाओं की सत्यता पर सवाल उठने लगे है और सबसे बड़ा सवाल यह है की इस घटना में जिसको हीरो बनाया गया है उसका नाम है रंजित कात्याल जबकि इस घटना का असली हीरो मेथुए थे ,
इसके अलावा की अन्य घटनाओं पर भी सवाल उठ गए है क्योकि इसमें सरकार के सभी कर्मचारी को नकारत्मक रूप से दिखाया गया है ,रितेश शाह जामिया में पढ़े लिखे है और इन्हें शोध करना पूरी तरह से सिखाया गया था ,फिल्म से सम्बन्धित एक कहानी कार की क्या क्या जिम्मेदारी होती है
लेकिन वर्तमान समय मे फिल्मो टीवी नाटको का जो दौर चल रहा है उसमे दरअसल ब्राह्मणवाद हावी हो रहा है , बाजीराव मस्तानी जिसमे पूरी फिल्म ही झूटी है क्योकि पेशवाओ के काल मे दलितों का सबसे बुरा हाल था लेकिन फिर भी फिल्म में पेशवा को सबका हमदर्द बताया गया है , इसी तरह टीवी पर आने वाले नाटक अशोक , जोधा अकबर राना प्रताप सब नाटक एकदम झूट , लेखको के हिसाब से वो घटनाओं से प्रेरित हुए है , साथ में ये डिस्क्लेमर भी लगा देते है की इसकी सत्यता प्रमाणित नहीं की जा रही है , लेकिन सवाल यह है की ये नोटिस किसको याद रहते है .
देश में इस वक् मीडिया फिल्म , कला की बर्बादी केवल ब

Posted on: 07 Jan 2016
BJP Government guided , operated by RSS is adamant to make the colour of education saffron .
they are not colouring the education but also the are spoiling all education system of India , they have cut the /scrapped the UGC Non NET fellowship , they have cut the fund for the Science research in the county , and they are now ready to cut the funds for university research .
in this process BJP Government has made many changes in the academic sector , have changed the vice chancellors of Universities , have changed the Rules of Appointment and also appointing all its favorite Professors as Directors , Deans, principals etc. recently HRD Minister has appointed its favorite Gajender Chouhan a Small time TV Actor who got fame through the Mahabharat Serials and also have done some B. C grade film in the Bollywood film Industry. when Students learnt about the appointment of Gajender Chouhan a wave of resentment shrouded the Institutes all students , faculty , staff were fed up . all she students started protesting against the appointment of Gajender as the Chai

Posted on: 02 Jan 2016
बाजीराव - मस्तानी देखने वाले भले ही पेशवा बाजीराव के कारनामे देख के अतीत में पेशवाओ के मुरीद हो जाएँ परन्तु यह अकाट्य सत्य है की पेशवाओ का राज अछूतो के लिए सबसे कष्टकारी और अपमानजनक राज था ।
पेशवाओ के राज में ब्राह्मणवाद इतना चरम पर था की अछूतो को सड़क पर चलने तक की अनुमति नहीं थी , यदि कोई अछूत सड़क पर चलता तो उसको आगे गले में हांड़ी लटकानी पड़ती थी ताकि उसका थूक जमीन पर न गिरे और पीछे झाड़ू लटकानी पड़ती थी ताकि उसके पदचिन्हो पर किसी ब्राह्मण का पैर न पड़े और वह अपवित्र न हो ।
पेशवा के ऐसे ही अमानवीय अत्याचारो से तंग आके महारास्ट्र के महारो ने अंग्रेजी सेना में भर्ती होके पेशवा बाजीराव को बुरी तरह हरा दिया था ।ये महारो का ही पराक्रम था की वे केवल 500 थे जबकि बाजीराव के 28000 सैनिक , पर केवल 500 महार अछूतो ने बाजीराव के 28000सैनिको को बुरी तरह धूल छटा दी थी ।
पेशवा बाजीराव का जनवरी 1818 में ईस्ट इण्डिया कंपनी के साथ कोरेगांव के पास अंतिम युद्ध हुआ । पेशवा की सेना में 28000 सैनिक थे और कंपनी की सेना में 500 पैदल और 50 घुड़सवार जिसमें अधिकतर महार थे । कंपनी की महार सेना ने पेशवा बाजीराव की सेना की धज्जियां उड़ा दीं । कोरेगांव का युद्ध स्मारक अछूत महार जाति के अद्भुत पर

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